पटना: बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स से एक तस्वीर जारी होती है जो जमुई नाबालिक की तस्वीर है पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर जो कानून के खिलाफ है POCSO Act के अनुसार यह अपराध के श्रेणी में आता है।तस्वीर का बिहार के मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। इस तरह का प्रसारण सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन माना जाता है।
इस मामले मे मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर पर FIR दर्ज
मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक स्टेनोग्राफर के खिलाफ पटना के सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीर साझा किए जाने को लेकर शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। प्राथमिकी में POCSO Act की धारा 23, BNS की धारा 73 तथा सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया है।
यौन अपराध मामले में पीड़िता की तस्वीर सार्वजनिक करने पर है रोक
कानून के तहत यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान सार्वजनिक करने पर रोक है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर तस्वीर या ऐसी जानकारी साझा करने को लेकर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, जिससे पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है।
सांसद मीसा भारती पहुंची थाना मुख्यमंत्री पर दर्ज करने FIR
इस मामले को लेकर राजद सांसद मीसा भारती ने भी सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री FIR की मांग की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री और सरकार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिकी में स्टेनोग्राफर को आरोपी बनाया गया है।
मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि तस्वीर किस माध्यम से प्रसारित हुई, उसे किसने साझा किया और घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियां क्या
पीड़िता की पहचान की सुरक्षा जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में मीडिया, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है कि ऐसी कोई तस्वीर, नाम, पता या अन्य जानकारी सार्वजनिक न की जाए जिससे पीड़ित की पहचान सामने आए। संवेदनशील मामलों में कानून के साथ-साथ पीड़ित की गरिमा और निजता की रक्षा की जाए।
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