डेंटल हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन के तेवर हुए सख्त, भासा के कुछ चिकित्सकों द्वारा दंत चिकित्सकों पर किया गया अभद्र टिप्पणी

पटना: बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) जो अपनी पूर्व निर्धारित मांगों को लेकर 16 और 17 अगस्त को काली पट्टी बांधकर कार्य करने और 18 19 अगस्त को ओपीडी सेवा बंद करने का निर्णय लिया है। इस बंद का विरोध मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर बिहार डेंटल हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन ( बिहार) लगातार कर रहा है।

बंद को विफल बनाने के लिए आयुष और दंत चिकित्सकों के पदाधिकारियों के बीच बैठक

आयुष और दंत चिकित्सकों के पदाधिकारी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मानव सेवा को ध्यान में रखते हुए भासा द्वारा बुलाए गए इस बंद का विरोध करेंगे और अपनी क्षमता के आधार पर ओपीडी सेवा को 18और 19 अगस्त को बहाल रखेंगे।

दंत चिकित्सकों ने भासा के कुछ पदाधिकारियों पर लगाया अभद्र टिप्पणी करने का आरोप

दंत और सामान्य चिकित्सक द्वारा मरीजो का इलाज

बिहार डेंटल हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर मुकेश सिंह चौहान ने भासा के कुछ डॉक्टरो पर गंभीर आरोप लगाया है ।उन्होंने कहा की भासा के कुछ डॉक्टरों द्वारा दंत चिकित्सकों और आयुष ‌ चिकित्सकों पर अभद्र टिप्पणी किया गया है।

भासा‌ अपनी भाषा को सुधार ले जो उनके स्वास्थ्य के लिए सही रहेगा

डॉ चौहान ने करे शब्दों में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के उन डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए सलाह दी है की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा ) की भाषा असंतुलित हो गया है उसे सुधार ले जो उनके स्वास्थ्य के लिए संतुलन बनाए रखने का कार्य करेगा।

भासा के डॉक्टरों को दंत चिकित्सकों द्वारा खुला चैलेंज

भासा के जिन चिकित्सकों द्वारा अभद्र टिप्पणी किया गया है वह लोग बैठे और उतने की संख्या में दंत चिकित्सकों को भी बैठाया जाए और योग्यता जांच परीक्षा करा कर ले ।किसके पास कितनी योग्यता है साफ हो जाएगा ।

सामान्य चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज

हड़ताल के बहाने क्या दोनों गुटों का शक्ति प्रदर्शन ?

भासा द्वारा जो आगामी निर्धारित तिथि को ओपीडी सेवा बंद करने का निर्णय लिया जा रहा है और उस बंद को दंत चिकित्सकों और आयुष चिकित्सकों द्वारा विफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है क्या इसके पीछे दोनों गुटों का शक्ति प्रदर्शन‌ तो नहीं।

आम जनता को मिलेगी बंद से राहत, होगा इलाज

स्वास्थ्य सेवा के लिए किसी भी परिस्थिति में बंदी का विरोध होना चाहिए। क्योंकि सरकारी अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद होने से लाखों की संख्या में मरीजों की स्वास्थ्य सेवा संकट में आ जाता है ।जीवन रक्षक कहे जाने वाले डॉक्टर अगर सामूहिक हड़ताल पर चले गए तो आम जनता का क्या होगा? कौन करेगा उनका इलाज कभी परिकल्पना कीजिए कि आपके अपने बीमार रहे और इलाज के लिए कोई डॉक्टर तैयार ना हो तो इससे बड़ा मानवीय भूल संसार में कुछ नहीं।

मानव सेवा ही सच्ची सेवा है जिसका अधिकार केवल डॉक्टर के पास

मानव सेवा ही सच्ची सेवा है जिसको करने का अधिकार केवल और केवल डॉक्टरों के पास है ।डॉक्टर अपने इस अधिकारों से किसी को वंचित करने का हक नहीं रखते है।

मानवाधिकार डैक्स

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