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शिक्षा के मंदिर में घंटों देरी से पहुंचे बिहार के शिक्षा मंत्री, राष्ट्रगान से पहले छोड़ा मंच

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हाजीपुुर : शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि अनुशासन, समय पालन, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय सम्मान की सीख भी देती है। ऐसे में जब शिक्षा विभाग का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति किसी शैक्षणिक कार्यक्रम में विलंब से पहुंचे और कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान से पहले मंच छोड़ दे, तो यह स्वाभाविक रूप से चर्चा और सवालों का विषय बन जाता है।

हाजीपुर के एक निजी विद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में बिहार के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। विद्यालय प्रबंधन द्वारा आमंत्रण के अनुसार मंत्री का आगमन शाम लगभग 6:00 बजे निर्धारित था, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार उनका आगमन लगभग दो घंटे बाद रात्री वेला के 8:00 बजे हुआ।  इस दौरान विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में अभिभावक, छात्र-छात्राएं और शिक्षक “मंत्री जी” के इंतजार में बैठे रहे।

लंबे इंतजार से बच्चों और अभिभावकों को हुई परेशानी।

कार्यक्रम खुले मैदान में आयोजित किया गया था। विद्यालय प्रशासन ने सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली थीं और सैकड़ों अभिभावक अपने बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने पहुंचे थे। लेकिन मुख्य अतिथि के विलंब से पहुंचने के कारण कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सका।

सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को हुई, जो लंबे समय तक अपनी प्रस्तुति के इंतजार में बैठे रहे। कई अभिभावकों ने भी देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि यदि आम लोगों से समय का पालन करने की अपेक्षा की जाती है, तो जनप्रतिनिधियों को भी समय की महत्ता का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

मंत्री ने सरकारी विद्यालयों की उपलब्धियां गिनाईं

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 97 हजार विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 20 हजार निजी विद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में आधार से पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। साथ ही उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि कई विद्यार्थियों का नामांकन एक साथ सरकारी और निजी दोनों विद्यालयों में दर्ज है, जिससे वास्तविक आंकड़ों पर असर पड़ता है।उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की बात कही

भारतीय परिधान में हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों ने भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ किया। देशभक्ति गीतों, लोकनृत्य और भारतीय संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। शिक्षा मंत्री ने भी विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि निजी विद्यालयों द्वारा भारतीय संस्कृति और संस्कारों को मंच के माध्यम से प्रस्तुत करना स्वागतयोग्य पहल

राष्ट्रगान से पहले मंत्री ने छोड़ा मंच! मंच संचालक ने मंत्री के मंच से चंद कदम की दूरी पर ही की थी राष्ट्रगान की घोषण

कार्यक्रम के अंत में शिक्षा मंत्री ने अपना संबोधन समाप्त किया और अपने काफिले के साथ मंच से नीचे उतरकर प्रस्थान करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी समय मंच संचालक ने राष्ट्रगान की घोषणा की।

राष्ट्रगान की घोषणा होते ही पूरा परिसर सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। छात्र, अभिभावक, शिक्षक और विद्यालय के अन्य कर्मचारी राष्ट्रगान में शामिल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शिक्षा मंत्री राष्ट्रगान शुरू होने से पहले ही मंच छोड़ चुके थे। इसी दौरान उनके काफिले में शामिल पुलिस वाहन का सायरन भी बजने लगा, जिससे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

घटना के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के समय सभी की उपस्थिति और सम्मान सुनिश्चित  होना चाहिए

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