मानवाधिकार ही है वैश्विक चुनौतियों के समाधान की बुनियाद: संयुक्त राष्ट्र महासचिव

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कहा है कि मानवाधिकारों पर हर कहीं प्रहार हो रहा है, निरंकुशताएँ बढ़ रही हैं, और लोकप्रियतावाद, नस्लवाद व चरमपंथ से समाज कमज़ोर हो रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कहा है कि मानवाधिकारों पर हर कहीं प्रहार हो रहा है, निरंकुशताएँ बढ़ रही हैं, और लोकप्रियतावाद, नस्लवाद व चरमपंथ से समाज कमज़ोर हो रहे हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन सभी विशाल चुनौतियों के समाधानों की बुनियाद, मानवाधिकारों में है.

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि मानवाधिकारों को कोई भी तानाशाह ज़ब्त नहीं कर सकता और ना ही उन्हें ग़रीबी द्वारा मिटाया जा सकता है. “तानाशाह जानते हैं, मानवाधिकार, उनके शासन के लिये सबसे बड़ा ख़तरा पैदा करते हैं.” उन्होंने कहा कि आमजन में अपने अधिकारों व आज़ादियों के लिये चेतना अन्तर्निहित है और दमन के विरुद्ध हर आन्दोलन, अन्याय के विरुद्ध हर प्रदर्शन मानवाधिकारों को पुष्ट करता है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि इन सभी अन्यायों का समाधान, मानवाधिकारों में निहित हैं. जलवायु संकट, मानवाधिकारों का भी संकट है. जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्रकृति स्वास्थ्य से जुड़े संकटों से मानवाधिकारों के लिये भी चुनौती पैदा हो रही है. बाढ़, सूखे और बढ़ते समुद्री जलस्तर से व्यापक मानवीय विनाश होने, भोजन की क़िल्लत होने और प्रवासन की आशंका है.
उन्होंने इस चुनौती से निपटने में युवजन, महिलाओं, लघु द्वीपीय देशों और आदिवासी समुदायों के प्रयासों का स्वागत किया और कहा कि यूएन उनके साथ खड़ा है.

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