नालंदा में मानवता शर्मसार, नहीं मिली एंबुलेंस, ठेले पर लेकर गए युवक का शव

ताजा मामला नालंदा का है जहां ऐंबुलेंस नहीं मिलने पर मृतक के परिजन ठेले पर लेकर गए युवक का शव

बिहार में सुशासन की सरकार चाहे लाख दावे करे लेकिन उनकी तमाम दावों की पोल खुल ही जाती एक पार फिर ऐसी तस्वीरें सामने आईं हैं जिसने राज्य सरकार के प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादें की पोल खोल कर रख दीं हैं क्या इसके बाद भी राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई भी बदलाव होगा… अस्पताल में मरीजों को मूलभूत सुविधाओं नहीं मिल पा रही है.ताजा मामला नालंदा का है जहां ऐंबुलेंस नहीं मिलने पर मृतक के परिजन ठेले पर लेकर गए युवक का शव, मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीरें जीतनी दर्दनाक है उतनी ही शर्मनाक भी जहां एक ओर राज्य सरकार प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादें कर रही हैं. वहीं दुसरी ओर राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई भी बदलाव होता नहीं दिख रहा है अस्पताल में मरीजों को मूलभूत सुविधाऐं भी नहीं मिल पा रही है. बिहार के नालंदा से अस्पताल की लापरवाही को लेकर ये बड़ा मामला सामने आया है. दरअसल ये मामला हिसा शहर के टोली पासवान का है. जहां पर अमरजीत कुमार(दिव्यांग) की तबियत बिगड़ने के बाद उसे शुक्रवार की सुबह अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एक भी एंबुलेंस नहीं मिली. जिस वजह से परिजनों उसे सब्जी के ठेले पर ही लादकर अस्पताल लेकर गए. जहां डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया. इसके बाद भी अस्पताल में कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने परिजनों से ठेले पर ही शव को ले जाने के लिए कह दिया. जिसके बाद परिजन शव को ठेले पर ही लेकर वापस चले गए.
नालंदा के इस अनुमंडलीय अस्पताल में सुविधा का भारी अभाव देखने को मिला. अस्पताल में प्रतिदिन कई मरीज भर्ती होते है. कई मरीज ऐसे भी आते है जिनकी हालत गंभीर रूप से देखने को मिलती है. इस तरह के मरीजों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाने के लिए भी पूरे अस्पताल में महज एक एंबुलेंस है. जो कि प्रसव को लाने जाने के काम लगी रहती है. नालंदा में अक्सर इस प्रकार के मामले सामने आते रहे हैं जहां पर लोग अने परिजनों के सव को ठेले पर , रिक्शा पर ले जाते हुए दिखाई दिये हैं.
अस्पताल में है एंबुलेंस का अभाव
इस घटना के बाद अस्पताल के अधीक्षक आरके राजू ने बताया कि अस्पताल में पहले से ही एंबुलेंस का अभाव है. जिसके लिए जिला प्रशासन से अस्पताल में एंबुलेंस बढ़ाने के लिए मांग की गई है. पर्याप्त संख्या में अस्पताल में एंबुलेंस न होने के कारण मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. पूरे अस्पताल में महज एक एंबुलेंस के कारण लोगों को शव ले जाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
ये पहला मौका नहीं है जब बिहार में इस तरह की घटना सामने आई है 7 अप्रैल को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस सिंहवाड़ा सीएचसी को मिला पर इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ढाई माह से एंबुलेंस तेल के अभाव में गैरेज में यूं ही पड़ा हुआ है। स्वास्थ्य सचिव को जानकारी दी गई कि 26 फरवरी को स्थानीय विधायक सह श्रम संसाधन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री जीवेश कुमार ने सीएचसी सिंहवाड़ा को हाईटेक सुविधा से युक्त एंबुलेंस सुपुर्द किया। मंत्री उद्घाटन करके चले गए लेकिन एंबुलेंस गैरेज से बाहर तेल के अभाव में नहीं निकल सका। एंबुलेंस लगभग 22 लाख की लागत से खरीदा गया है। 9 फरवरी 2022 सुपौल का मामला है सड़क हादसे में जख्मी युवक को सरकारी अस्पताल में नहीं मिला एंबुलेंस, तड़प-तड़प कर मौत.10 फरवरी 2022 का मामला है जब हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने किया था रेफर, एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण हुई मौत दरअसल रेफर होने के डेढ़ घंटे बाद तक परिजनों को एक्सीडेंट में घायल सिंटू को बाहर ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस नहीं मिल पाई. खटारा एंबुलेंस के सहारे चल रहा अस्पताल का एंबुलेंस उस वक्त गैरेज में था.
वहीं बेतिया में इससे भी बदतर तस्विरें देखने को मिलीं यहां एंबुलेंस शव ढोने के लिए, जिंदा के लिए नहीं:अस्पताल में 14 एंबुलेंस का दावा, फिर भी मरीज को रिक्शे पर ऑक्सीजन लगाकर जाना पड़ रहा जांच कराने ऐसी बुत सी खबरें हैं बिहार की जो यहां के स्वास्थ्य सेवाओं का पोल खोलने के लिए काफी है आखिर ऐसे कैसे जिंदा रहेगा बिहार?

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