अयोध्या के हनुमानगढ़ी की शाखा है पटना का महावीर मंदिर, किशोर कुणाल ने किया जबरन कब्जा

अयोध्या. राम की नगरी अयोध्या (Ayodhya) में एक और विवाद उठा है. ताजा विवाद बिहार के पटना स्थित महावीर मंदिर (Mahavir Temple) को लेकर है. इसके केंद्र में पटना के पूर्व एसएसपी और अयोध्या के इतिहास पर किताब लिखने वाले किशोर कुणाल और अयोध्या में हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi, Ayodhya) के धर्माचार्य और गद्दी नशीन अयोध्या हैं. हनुमानगढ़ी का दावा है कि पंच रामानंदी अखाड़ा से ही पटना के महावीर मंदिर का संचालन होता था. पटना के एसएसपी रहते हुए किशोर कुणाल ने साजिश कर महावीर मंदिर को अपने अधिकार में ले लिया. उसी वक्‍त से वहां पुजारियों और हनुमानगढ़ी से जुड़े महंतों का वर्चस्व खत्म हो गया है.

हनुमानगढ़ी के मौजूदा गद्दी नशीन प्रेमदास कहते हैं कि इस लड़ाई को वह न्यायालय की चौखट तक ले जाएंगे और आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने कहा है कि महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी की शाखा थी और हनुमानगढ़ी के ही सानिध्य में पटना में रागभोग पूजा पाठ चलता था. राम जन्मभूमि दर्शन मार्ग पर स्थित अमावा राजमंदिर अभी फिलहाल किशोर कुणाल के हक में है और यहीं पर महावीर मंदिर पटना ट्रस्ट की तरफ से संचालित किया है. यहां राम जन्मभूमि दर्शन करने वाले लोगों को नि:शुल्क भोजन और सामान जमा करने की सुविधा महावीर मंदिर पटना ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल द्वारा संचालित है.

प्रेम दास ने कहा कि पटना स्थित महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी का ही था. हनुमानगढ़ी के संत-महंत वहां पर रहते थे और यहीं से उसका देख-रेख होता था. लेकिन, बीच में किशोर कुणाल जब वहां पर अधिकारी बने, वहां के जो संत थे, राम गोपाल दास जी महाराज उनको नाजायज ढंग से फंसा दिया कि वह चोर-बदमाश हैं. इनके बिस्तर से इतने पैसे निकले हैं, पिस्टल निकला है. यह सब दिखा कर उनको बंद करवा दिया. राम गोपाल दास हाई कोर्ट से बरी हो गए. उसके बाद उन्होंने वहां पर अपना वर्चस्व बना लिया. प्रेम दास ने कहा है कि लोगों से उन्‍होंने सुना है कि पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल अब अपने बच्चे को वहां पर उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं.

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