कल सोमवार से शुरू हो रहा है लोक आस्था का महापर्व छठ, चार दिनों तक चलेगा यह विशेष अनुष्ठान

केलवा के पात पर उगेलन सुरूज देव, ए कोपी कोपी बोलेली छठी माई आदि गीतों के साथ बाजारों में रौनक बढ़ गई है. चारों ओर साफ-सफाई होने लगी है.

केलवा के पात पर उगेलन सुरूज देव, ए कोपी कोपी बोलेली छठी माई आदि गीतों के साथ बाजारों में रौनक बढ़ गई है. चारों ओर साफ-सफाई होने लगी है. क्या बूढ़े क्या बच्चे सभी छठ माई की स्तुति में लग गए हैं.
लोक आस्था के महापर्व छठ के लिए होने वाले विशेष अनुष्ठान के लिए तैयारियां शुरू हो गईं हैं. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का पहला दिन कल सोमवार से शुरू हो रहा है. व्रती कल चना दाल, लौकी की सब्जी व नए अरवा चावल का भात खाकर महापर्व की शुरूआत करेंगे.
इसके बाद मंगलवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा. व्रती संतान की प्राप्ति, सुख-समृद्धि, संतान की दीघार्यु और आरोग्य की कामना आदि के लिए साक्षात सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते/ करती हैं.
वहीं 10 नवंबर दिन बुधवार की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. छठ महापर्व के चतुर्थ दिवसीय अनुष्ठान के अंतिम दिन गुरुवार 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न हो जाएगा.
ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और परिवार को सुख, शांति व धन-धान्य से परिपूर्ण करती हैं. सूर्यदेव के प्रिय तिथि पर पूजा, अनुष्ठान करने से अभीष्ट फल प्रदान करते हैं. इनकी उपासना से असाध्य रोग, कष्ट, शत्रु का नाश, सौभाग्य तथा संतान की प्राप्ति होती है.

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