इस वजह से चुनाव आयोग ने जब्त किया लोजपा का सिंबल

लोक जनशक्ति पार्टी में जारी सियासी तनातनी के बीच चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए लोजपा का सिंबल जब्त कर लिया है.

लोक जनशक्ति पार्टी में जारी सियासी तनातनी के बीच चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए लोजपा का सिंबल जब्त कर लिया है. दरअसल, लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके पुत्र चिराग पासवान व भाई केन्द्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के बीच राजनैतिक विरासत को ले जंग छिड़ी है. इसी मुद्दे को ले चुनाव आयोग का कहना है कि इन दो समूहों में से किसी को भी लोजपा के चुनाव चिन्ह का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. आयोग ने अंतरिम उपाय के रूप में दोनों से अपने समूह का नाम और प्रतीक चुनने को कहा है, जो बाद में उम्मीदवारों को आवंटित किए जा सकते हैं.

गौरतलब है कि इस पूरे मामले पर चिराग पासवान ने सोशल मीडिया के जरिये भड़ास निकाली है. उनका कहना है कि वंचित समाज की आवाज़ को देशभर में पिताजी ने आंदोलन बनाया. उस आंदोलन की मुखर आवाज़ बनी लोजपा. लेकिन सत्ता के लोभ में फंस चुके कुछ सह यात्रियों ने ही पिता जी के आंदोलन की आवाज़ को कमज़ोर कर दिया. आयोग का ये अंतरिम फैसला है. हमारे तर्कों को जगह मिली है. लोजपा की हुंकार कायम रहेगी.
भयंकर कुचक्र के तहत लोजपा को खंडित करने की मुहिम जारी है. पिताजी के 5 दशकों के परिश्रम को बर्बाद करने में बिहार के सत्तालोलुपों का साथ अपनो ने भी दिया. पिताजी के संकल्पों को विराम देने की इस कोशिश को सफल नहीं होने देंगे. साथियों और समर्थकों से वादा है – जीत लोजपा की ही होगी.
चुनाव आयोग का आज का फैसला उनसे सवाल की तरह है जिन्होंने गरीबों की लड़ाई लड़ रही लोजपा की पहचान मिटाने की कोशिश की है. मां का स्थान रखने वाली पार्टी को महज एक कुर्सी के लिए दलित विरोधी जेडीयू के हाथ बेचने की साज़िश की गई. साज़िश सफल नहीं होगी। लोजपा का ध्वज शान से लहराएगा.

 

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