उर्दू शिक्षक संघ ने शिक्षा सचिव को शिक्षक व शिक्षा हित में दिये सुझाव

झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ की प्रदेश इकाई द्वारा एक ज्ञापन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा को सौंपा गया. संघ की ओर से शिक्षक व शिक्षा हित में विभाग को कई सुझाव दिये गये.

झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ की प्रदेश इकाई द्वारा एक ज्ञापन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा को सौंपा गया. संघ की ओर से शिक्षक व शिक्षा हित में विभाग को कई सुझाव दिये गये. जानकारी देते हुए प्रदेश महासचिव अमीन अहमद ने बताया कि विद्यालय का वर्तमान समय सारणी सुबह 8 से 2 बजे तक को यथावत रहने दिया जाए. इसमें साप्ताहिक हाफडे को भी पूर्व की भांति ही रहने दिया जाए. सामान्य विद्यालयों में शनिवार तथा उर्दू विद्यालयों में गुरूवार को आधे समय तक विद्यालय का संचालन को बनाये रखा जाए अथवा प्रत्येक दूसरे एवं चौथे शनिवार को हाफ डे का प्रावधान किया जाय. प्रत्येक वर्ष पहली अप्रैल से 30 जून तक मौसम के प्रभाव को देखते हुए बच्चों के हित में पांच घंटे का विद्यालय संचालन होता आया है. जिसे पूर्व की भांति ही रहने दिया जाए. उन्होंने कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार प्राथमिक विद्यालय 200 दिन और उच्च प्राथमिक विद्यालय अधिकतम 220 दिनों तक पुरे वर्ष भर में संचालित करने का प्रावधान है. इस नियम को लागू किया जाए. झारखंड में सरकारी विद्यालय सप्ताह में 6 दिन संचालित होता है. जबकि निजी विद्यालय 5 दिन खुलते हैं. सप्ताह में 5 दिनों का सरकारी विद्यालय संचालित किये जाने से आरटीई 2009 के मुताबिक दिन व घंटे निर्धारित किये जाने में आसानी होगी. अमीन अहमद के मुताबिक कोविड-19 कार्यकाल में शिक्षकों से स्वास्थ्य रक्षण का कार्य लिया गया. शिक्षकों से भी स्वास्थ्य कर्मियों की तरह ही सेवा ली गई. इसलिए शिक्षकों को कोरोना योद्धा घोषित कर सभी सरकारी सुविधाएं दी जाए. 2003 के विज्ञापन में बहाल हुए दो अलग-अलग चरणों के शिक्षकों को अलग अलग पेंशन योजना में रखा गया है. इस विज्ञापन के आधार पर 2004 मेें नियुक्त शिक्षकों को जीपीएफ व पुरानी पेंशन योजना तथा उसी सूची के आधार पर 2005 में नियुक्त शिक्षकों को सीपीएफ व नई पेंशन योजना में रखा गया है. इस ऋृटि को सुधार करते हुए 2005 में नियुक्त शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन योजना के अन्तर्गत किया जाए.
संघ की ओर से कहा गया है कि स्कूली बच्चों का बैंक खाता खोलने की जिम्मेदारी पुरी तरह शिक्षकों को दे दी गई है. स्कूल खुलने के बाद इससे शिक्षण कार्यों तथा विद्यालय संचालन में हमेशा व्यवधान उत्पन्न होगा. इसलिए यह जिम्मेदारी शिक्षकों को नहीं दी जाए. विद्यालयों में विभिन्न लेखा संधारन के लिए कम्प्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था प्रिंटर सहित विद्यालयों में की जाय जिससे शिक्षकों की समस्याओं का समाधान हो सके और उन्हें रिपोर्ट तैयार करने में कठिनाई ना हो. उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय से शिक्षक अंतर जिला एवं जोनवार स्थानांतरण की राह देख रहे हैं. सरकार के इस महत्वकांक्षी योजना को निकट समय में ही धरातल पर उतारा जाए. वर्तमान में एमडीएम संचालन का जो आदेश निर्गत किया गया है. वह धरातल पर सफल नहीं होगा. क्योंकि यह आदेश अव्यवहारिक है. एमडीएम में अनेकों छोटे-छोटे खर्च होते हैं. जिसका पूर्व क्रय मुश्किल है. कम बच्चों की संख्या वाले स्कूल व सुदूरवर्ती गांवों में अवस्थित स्कूलों को किसी वेंडर से क्रय करना मुश्किल है. हर दुकानदार पहले सामग्री देने और बाद में पैसे लेने को कतई तैयार नहीं हो सकते. इसलिए एमडीएम से शिक्षकों को अलग करते हुए पुर्व की व्यवस्था को लागू रखा जाए. इसी तरह कई स्कूलों का चयन कर शिक्षकों से जाति प्रमाण पत्र बनाने का काम लिया जा रहा है. शिक्षक किसी की जाति का प्रमाण कैसे कर सकते हैं. दबंग लोगों की दबिश के कारण शिक्षक यह कार्य भलीभांति नहीं कर पायेंगे, इसलिए शिक्षकों को इस कार्य से अलग रखा जाए.
अमीन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रोन्नति पर से रोक हटा लिये जाने के बाद अब शिक्षकों के लंबित प्रोन्नति को भी जारी किया जाए. ग्रेड-2 से ग्रेड-8 तक के सभी ग्रेडों में शिक्षकों को प्रोन्नति दी जाए. राज्य के उर्दू स्कूलों में आज भी गैर उर्दू भाषी शिक्षक पदस्थापित हैं. जिससे मातृभाषा की शिक्षा बच्चों को नहीं मिल पा रही है. इसलिए उर्दू स्कूलों में उर्दू में नियुक्त अथवा उर्दू भाषा के जानकार शिक्षकों को पदस्थापित किया जाए. इसी प्रकार पूर्ववर्ती सरकार ने एक बड़ी गलती करते हुए बड़ी संख्या में जैक द्वारा बहाल 2014 एवं 2015 में नियमित उर्दू शिक्षकों को योजना मद में नियुक्बत कर दिया है. जिससे अनेकों प्रकार की दिक्कतें आ रही हैं.इसलिए पूर्व की सरकार की इस गलती को सुधारते हुए योजना मद में नियुक्त उर्दू शिक्षकों को गैर योजना मद में शामिल किया जाए. इसके साथ ही केवल शिक्षा विभाग में बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य करना गलत है. राज्य के सभी कार्यालयों में एक साथ इसे लागू करने की जरूरत है. कोविड-19 पुरी तरह खत्म नहीं होने के कारण इसे स्थगित रखना चाहिए. ज्ञापन की प्रतिलिपि निदेशक, प्राथमिक शिक्षा एवं प्रशासी पदाधिकारी, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची को भी दी गई है. संघ के वरीय उपाध्यक्ष नाज़िम अशरफ एवं महासचिव अमीन अहमद के हस्ताक्षर से ज्ञापन सौंपा गया है.

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