देश में बहु विधान नहीं हमे संविधान चाहिए– स्वामी सीताराम शरण जी महाराज

राष्ट्र बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक सह राष्ट्रीय संरक्षक स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की अध्यक्षता में एक वर्चुअल बैठक मंगलवार शाम 7:00 बजे की गई।

राष्ट्र बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक सह राष्ट्रीय संरक्षक स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की अध्यक्षता में एक वर्चुअल बैठक मंगलवार शाम 7:00 बजे की गई। जिसकी संचालन झारखंड प्रदेश अध्यक्ष (महिला) श्रीमती अंकिता श्री व प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती लोकृती गुप्ता ने की । इस वर्चुअल बैठक में संगठन (RBA) के राष्ट्रीय संयोजक स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ने बताया कि राष्ट्र बचाओ आंदोलन संगठन बनाने की आवश्यकता हमे इसलिए पड़ी की आज देश में संविधान नहीं बहू विधान चल रहा है। क्योंकि संविधान दो शब्दों से मिलाकर बना है सम+ विधान = संविधान। मतलब है ऐसा विधान जो सब पर समान रूप से लागू हो लेकिन दुर्भाग्यवश से आजादी के 74 साल बाद भी भारत में संविधान नहीं बल्कि बहू विधान चल रहा है। जैसे हिंदुओं के लिए अलग विधान, मुस्लिम के लिए अलग विधान, पारसी के लिए अलग विधान, और क्रिश्चियन के लिए अलग विधान । हमारा संविधान के आर्टिकल 44 कहता है कि इस देश में एक समान नागरिक संहिता होनी चाहिए ।उन्होंने कहा कि आज देश में लगभग 4 लाख मठ मंदिर है जो केंद्र सरकार के अधीन हैं जबकि मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा सारे धर्म स्थल केंद्र सरकार के कब्जे से बाहर है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि चाहे तो सारे धर्म स्थल केंद्र सरकार के कब्जे में हो या फिर सारे धर्म स्थल केंद्र सरकार से मुक्त हो। आरबीए संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने कहा कि भारत में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए 222 ऐसे अंग्रेजी काले कानून हैं जो आज भी हम पर लागू है। अंग्रेजों ने जितने कानून बनाए थे वह सब भारत को गुलाम बनाने के लिए बनाए थे, न्याय देने के लिए नहीं। यदि अंग्रेजी कानून अच्छे होते तो अंग्रेजों को भी सजा मिलती लेकिन एक अंग्रेज को सजा नहीं मिली। सजा मिली तो केवल आजादी मांगने वालों को । 1857 की क्रांति को खत्म करने के लिए 1860 में इंडियन पीनल कोड पीनल कोड बनाया गया, 18 61 में पुलिस एक्ट बनाया गया, मंदिरों पर कब्जा करने के लिए 1863 में कानून बना, 1874 में एविडेंस एक्ट बनाया गया । जो आज भी स्वतंत्र भारत में चल रहा है लागू है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस वर्चुअल बैठक में झारखंड प्रदेश की महिला प्रदेश अध्यक्ष अंकिता श्री, प्रदेश महासचिव एडवोकेट ललन कुमार सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष संजय पंडित, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती लोकृती गुप्ता, प्रदेश सलाहकार रणधीर जी, श्रीमती सुमन सिंह जी, राजेश सिंह जी, रांची महानगर संयोजक शैलेंद्र जी,श्रीमती बबीता वर्मा जी, श्रीमती रीता शर्मा जी, वीरपाल जी, श्रीमती श्वेता कुमारी जी, संतोष कुमार जी, सबों ने एक स्वर में केंद्र सरकार से — एक देश- एक नागरिक संहिता, एक देश – एक जनसंख्या नियंत्रण संहिता, एक देश – एक शिक्षा बोर्ड, एक देश- एक दंड संहिता, एक देश- एक कर संहिता, एक देश- एक प्रशासनिक संहिता, एक देश- एक मजदूर संहिता, एक देश -एक न्यायिक संहिता, एक देश -एक राष्ट्रभाषा और एक देश -एक चिकित्सा संहिता की मांग पर अपनी अपने विचार रखी।

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