निर्दलीय विधायक सरयू राय ने बयान की अपनी पीड़ा, कहा

जमशेदपुर स्टेशन के दूसरे प्रवेश द्वार का उद्घाटन कार्यक्रम कुप्रबंध से भरा था

जमशेदपुर : चक्रधरपुर रेलमंडल द्वारा शनिवार को आयोजित जमशेदपुर स्टेशन के दूसरे प्रवेश द्वार का उद्घाटन कार्यक्रम कुप्रबंध से भरा था और शालीनता रहित था। लगा ही नहीं कि यह भारत सरकार के एक शीर्ष उपक्रम का कार्यक्रम है। कार्यक्रम का आयोजन न केवल कुप्रबंध से भरा था, बल्कि आमंत्रित अतिथियों के लिए अपमानजनक भी था। रेलवे स्टेशन का दूसरा प्रवेश द्वार मेरे विधानसभा क्षेत्र की ओर खुलता है और वहां से निकलने वाला पैदल पार पथ (फुट ओवर ब्रिज) विधायक मंगल कालिन्दी के क्षेत्र तक जाता है। हम दोनों को लिखित आमंत्रण देकर रेल अधिकारियों ने बुलाया था, परंतु वहां की व्यवस्था से लगा कि रेल अधिकारियों को केवल माननीय सांसद महोदय की ही चिंता है। विधायकों का कोई महत्व उनकी नज़र में नहीं है। स्थानीय विधायकों को बुलाकर उन्होंने केवल औपचारिकता का निर्वाह किया है। लगा कि हमें उन्होंने केवल पुष्पगुच्छ और शाल स्वीकार करने के लिए बुलाया था। चेम्बर ऑफ कॉमर्स रेलवे का महत्वपूर्ण हितधारक संगठन है। चेम्बर के अध्यक्ष की कोई भूमिका इस कार्यक्रम में रेल अधिकारियों ने नहीं निर्धारित किया था। रेलवे के दूसरे प्रवेश द्वार का प्रयोग करने वालों में मेरे विधानसभा क्षेत्र की जनता सर्वाधिक है। प्रवेश करने के बाद और प्रवेश करने से पहले जनसुविधाओं के घोर अभाव के बारे में हम कुछ बता नहीं दे और उनकी व्यवस्था करने के बारे में हम सार्वजनिक रूप से मांग नहीं कर दें, शायद इसलिए रेल अधिकारियों ने न तो मुझे दो शब्द कहने का अवसर दिया और न ही विधायक मंगल कालिंदी को ही कुछ बताने का अवसर दिया। मंच से उतर कर उद्घाटन स्थल तक जाने के लिए भी उन्होंने ऐसा कोई प्रबंध नहीं किया था, ताकि हम आमंत्रित अतिथि भी वहां तक निर्विघ्न पहुंच सकें। उन्हें केवल सांसद महोदय को ही उनके कार्यकर्ताओं के साथ उद्घाटन स्थल तक सुरक्षित पहुंचाने की चिंता थी। शायद ऐसा इसलिए भी हो कि सांसद महोदय ही केन्द्र सरकार में बैठे सरकारी दल के एकमात्र प्रतिनिधि हैं। उस दल का एक भी विधायक कोल्हान से नहीं है। मेरे लिए यह दूसरा अवसर था जब लगा कि यदि जमशेदपुर में सांसद महोदय के साथ किसी संयुक्त सार्वजनिक कार्यक्रम में जाने का आमंत्रण मिले तो अपने साथ कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह लेकर जाना चाहिए, ताकि वे भी समानांतर गला फाड़ नारे लगा सकें और लोगों को धकिया कर अपने लिए आगे जाने का रास्ता बना सकें। भारत सरकार के रेल विभाग के कार्यक्रम में ऐसी भेड़िया धसान स्थिति उत्पन्न होने का अंदेशा मुझे नहीं था और न ही यह उम्मीद थी कि रेल अधिकारियों ने हमें बुलाकर मात्र औपचारिकता का निर्वाह किया है। इस कारण मुझे उद्घाटन स्थल तक पहुंचे बिना वापस आना पड़ा। उम्मीद है रेल अधिकारी किसी को अपने कार्यक्रम में अतिथि के रूप में बुलाकर भविष्य में ऐसी अपमानजनक स्थिति उत्पन्न नहीं करेंगे।

Show More

Related Articles