भोजपुरी मगही कई जिलों से बाहर पर उर्दू को हर जिले में मान्यता यह तुष्टीकरण नहीं तो और क्या है : संजय पोद्दार

राज्य सरकार पर भाषा के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया

रांची : अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश सचिव संजय पोद्दार ने राज्य सरकार पर भाषा के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया है। धनबाद बोकारो में भोजपुरी मगही भाषा को हटा दिया गया, वहीं उर्दू भाषा को सभी जिलों में शामिल रखा गया है, अगर भाषा को आधार माना जाए तो धनबाद और बोकारो सहित राज्य के कई जिलों में उर्दू से ज्यादा भोजपुरी और मगही भाषा वाले लोग कई दशकों से इस प्रदेश में रहते आ रहे हैं। राज्य का कौन सा ऐसा जिला है जहां मगही और भोजपुरी नहीं बोली जाती है। धनबाद-बोकारो में अगर सर्वे करें तो यहां 2 जिलों में सबसे ज्यादा संख्या भोजपुरी और मगही बोलने वाले लोग मिलेंगे। वोट के समय लंबी लंबी बातें जब सत्ता मिली तो तुष्टीकरण की राजनीति कांग्रेस राजद सहित झारखंड मुक्ति मोर्चा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भोजपुरी मगही भाषा बोलने वाले लोगों का वोट इन्हें नहीं मिला है। क्या कांग्रेस के कई विधायक मगही और भोजपुरी बोलने वाले जिलों से जीत कर आए है। झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राजद ने सत्ता में आते ही भोजपुरी और मगही बोलने वालों का अपमान शुरू कर दिया। मंत्री रामेश्वर उरांव दो ना देना पर कोना मत देना। राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो भोजपुरी-मगही बोलने वाले लोग झारखंड में कमा खा सकते हैं, परंतु यहां उन्हें अधिकार नहीं मिलेगा। ऐसे कई उदाहरण है। एक चुनी हुई सरकार के लोग इस तरह के भाषा का प्रयोग कर आपस में मतभेद पैदा कर भाषा के नाम पर लड़ा कर अपनी रोटी सेकना चाहती है। उर्दू भाषा का जितना अधिकार झारखंड में है उतना ही अधिकार भोजपुरी और मगही बोलने वालों का है। सरकार अपना वोट बैंक के कारण तुष्टीकरण की राजनीति करना चाहती है, जो राज्य के हित में नहीं है।

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