मॉब लिंचिंग से जुड़े विधेयक का राजभवन कर रहा अध्ययन, इस पर राजभवन लेगा कानूनी सलाह

इस विधेयक पर भाजपा ने जताई है आपत्ति

रांची : झारखंड में मॉब लिंचिंग से जुड़े  भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक का राजभवन अध्ययन कर रहा है। इस पर राजभवन अब कानूनी सलाह लेगा।  खासकर उन बिंदुओं पर विधि परामर्श लिया जाएगा  जिसके आधार पर कई संस्थाओं ने राज्यपाल से मिलकर विधेयक पर स्वीकृति नहीं देने का अनुरोध किया है। प्रदेश भाजपा ने इस विधेयक पर आपत्ति भी जताई है। भाजपा का कहना है कि पारित विधेयक में कई ऐसे प्रविधान हैं जो भविष्य में आदिवासियों और मूलवासियों की प्रताड़ना का कारण बन सकते हैं। प्रस्तावित कानून में दो या दो से ज्यादा लोगों को भीड़ माना गया है। इसके अलावा सामाजिक बहिष्कार, किसी व्यक्ति के कारोबार या व्यवसाय का बहिष्कार, आजीविका के स्थान को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, परिवहन सहित लोक सेवा से तिरस्कार करना सहित तमाम ऐसे बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनपर भाजपा ने आपत्ति जताई है। झारखंड विधानसभा में यह विधेयक 21 दिसंबर, 2021 को पारित हुआ है। विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के लिए हाल ही में राजभवन को भेजी गई है। इस विधेयक में भीड़ हिंसा में शामिल लोगों को तीन साल से लेकर अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रविधान किया गया है। यदि भीड़ हिंसा में किसी की मौत हो जाती है तो दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा होगी। गंभीर चोट आने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रविधान है।

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