तय समय पर काम नहीं करने वाले 12 सीओ पर लगा जुर्माना, फिर भी कम नहीं हो रही पेंडेंसी

रांची : आमलोगों का कार्य तय समय पर हो, इसके लिए सरकार ने सेवा गारंटी अधिनियम लागू की है। मगर सरकारी कार्यालयों खासकर अंचलों में इस कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आती है। लोगों को अपना काम कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। राजधानी में म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के मामले भी कई अंचलों में तय समय सीमा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। वर्तमान में अरगोड़ा, कांके और नामकुम अंचल में सबसे अधिक म्यूटेशन के मामले पेंडिंग हैं। वह भी तब जब डीसी छवि रंजन ने 12 अंचलों के सीओ पर 5 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका है। जिन सीओ पर जुर्माना ठोंका गया है उनमें कई का ट्रांसफर भी हो चुका है। डीसी की ओर से सख्ती के बावजूद अभी भी अंचलों में पेंडेंसी को दूर करने को लेकर सीओ की दिलचस्पी नहीं है, जबकि, अंचलों में सैकड़ों आवेदन 30 दिन से अधिक समय से ऐसे हैं जिसमें किसी प्रकार का ऑब्जेक्शन नहीं है। फिर भी निपटारा नहीं किया गया। वहीं, ऐसे मामले भी हैं जिनमें ऑब्जेक्शन आने के बाद 90 दिनों में निपटारा कर दिया जाना चाहिए। मगर तय समय गुजरने के बावजूद अंचलों के पदाधिकारियों को इसकी परवाह नहीं है।

12 सीओ पर लगाया गया है जुर्माना

रांची के जिन अंचलों में बेहद सुस्त तरीके से कार्य हो रहा था उसके सीओ को डीसी की ओर से शोकॉज किया गया था। 26 दिसंबर 2021 को हुई बैठक में यह तय हो गया था कि 17.12.21 तक जिन अंचलों में तय समय पूरा होने के बाद भी पेंडेंसी है उनके सीओ के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके तहत रांची के 12 सीओ पर सेवा गारंटी अधिनियम के तहत पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना डीसी छवि रंजन ने लगाया है। जुर्माना लगाकर डीसी ने तय समय पर पेंडेंसी दूर करने का संदेश सभी सीओ को दिया है। वहीं, दोबारा सुस्ती बरतने वाले सीओ पर लगने वाले जुर्माना राशि में इजाफा होगा।

इन पर लगा है जुर्माना : अरविंद कुमार ओझा (अरगोड़ा), राजेश डुंगडुंग (बुंडू), संतोष कुमार शुक्ला (नगड़ी), संतोष कुमार विद्यार्थी (बुढ़मू), दिवाकर प्रसाद चंद्रिका (कांके), सुमंत तिर्की (बेड़ो), मनोज कुमार (बड़गाईं), पुष्पक रजक (अनगड़ा), विजय केरकेट्‌टा (ओरमांझी), सुरेंद्र उरांव (नामकुम), विजय शिशुपाल आर्य (खलारी), ओम प्रकाश मंडल (हेहल)।

यह है नियम

सेवा गारंटी अधिनियम-2011 की धारा- 7 (1) के तहत ससमय मामलों का निष्पादन किया जाना है। म्यूटेशन के आवेदन में बिना ऑब्जेक्शन वाले मामले में 30 दिन और ऑब्जेक्शन वाले मामले को 90 दिनों में निपटारा करने का नियम है। इसका पालन नहीं करने की स्थिति में प्रतिदिन प्रति मामले 250 रुपए के तहत विलंब शुल्क की गणना के अनुसार फाइन लगाने का प्रावधान है। दिसंबर 2020 में भी डीसी छवि रंजन ने 16 अंचलों के सीओ को शोकॉज करते हुए जुर्माना लगाया था।

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