कांग्रेस के चिंतन शिविर ने बढ़ा दी है चिंता बजट सत्र में अपने ही सरकार को घेरेगी

बजट सत्र में अपने ही सरकार को घेरेगी

रांची : प्रदेश कांग्रेस के चिंतन शिवर ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। काफी अरसे के सत्ता में आई कांग्रेस को संगठन को मजबूत करने की चिंता सता रही है। सरकार में रहने के बाद भी कार्यकर्ता और विधायक खुश नहीं हैं। इससे न तो संगठन मजबूत हो रहा है और न ही कार्यकर्ताओं की संख्या ही बढ़ रही है। यहां तक कि सदस्यता अभियान में भी कोई ख़ास प्रगति नहीं ही रही है। इसके लिए बजट सत्र में कांग्रेस का तेवर तल्ख दिख सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बजट सत्र में कांग्रेस के विधायक ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन और जेपीएससी के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगे। भाषा विवाद पर कहा कि पिछली सरकार ने जो गलती किया था उसे हमारी सरकार ने उसका समाधान कर दिया है। बोकारो-धनबाद जिले से क्षेत्रीय भाषा की सूची से भोजपुर-महगी को हटा दिया है। अब कोई विवाद नहीं है। राजेश ठाकुर ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए इस तरह के शिविर का आयोजन किया जाता है। इसमें कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता अपनी बातों को रखते हैं। संगठन के शीर्ष नेता और हमने सभी की बातों को सुना है। जल्द ही चिंतन शिविर के सार को सीएम हेमंत सोरेन के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि अब सरकार एकतरफा नहीं चलेगी। दो साल तो कोरोना में निकल गया। अब काम करने की बारी है। तीन साल काम करने का मौका है।

क्या है कांग्रेसियों की चिंता

कांग्रेसियों का कहना है कि कोई भी पार्टी की रीढ़ कार्यकर्ता होते हैं, लेकिन इस सरकार में कांग्रेस के कार्यकर्ता ही अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। सरकार में रहने के बावजूद उनकी अहमियत नहीं के बराबर रह गई है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जमीनी मेहनत हमलोग करते हैं, लेकिन फायदा सहयोगी दल झामुमो को हो रहा है। बोर्ड-निगम में भी कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिल पा रही है।

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