संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी का बयान, महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं और युद्ध व शान्ति के समय में भी समान रूप से सार्वभौमिक हैं

प्रमिला पैटन ने सुरक्षा परिषद में कहा है कि महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं और युद्ध व शान्ति के समय में भी समान रूप से सार्वभौमिक हैं.

संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी प्रमिला पैटन ने सुरक्षा परिषद में कहा है कि महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं और युद्ध व शान्ति के समय में भी समान रूप से सार्वभौमिक हैं. उन्होंने राजदूतों से, संघर्ष और युद्ध सम्बन्धी यौन हिंसा के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया.

बता दें कि प्रमिल पैटन, संघर्षों की स्थितियों में यौन हिंसा पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि हैं, और वो युद्ध में बलात्कार का एक हथियार के रूप में प्रयोग रोकने के लिये काम कर रही हैं.
प्रमिल पैटन ने याद दिलाते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद ने महिलाओं, शान्ति व सुरक्षा पर 10 प्रस्ताव पारित किये हैं, जिनमें से पाँच प्रस्ताव, संघर्षों सम्बन्धी यौन हिंसा की रोकथाम और उनसे निपटने पर केन्द्रित हैं.
उन्होंने सवाल पेश किया कि उन घोषणाओं का इस समय यूक्रेन, अफ़ग़ानिस्तान, म्याँमार या इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र टीगरे की महिलाओं के लिये क्या अर्थ है.
उन्होंने कहा, “युद्ध की हर एक नई लहर अपने साथ, मानव त्रासदी का एक बढ़ा हुआ प्रवाह लाती है, जिनमें युद्ध का सबसे पुराना, सबसे ज़्यादा ख़ामोश, और सबसे कम निन्दित अपराध भी शामिल है.”
प्रमिला पैटन ने ध्यान दिलाया कि क़ानूनी कार्रवाई, किस तरह रोकथाम के एक साधन के रूप में अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे, इन अपराधों के लिये दण्डमुक्ति और भय मुक्ति के चलन को, निवारण का चलन बनाने में मदद मिल सकती है.

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