छ: हफ्ते से अधिक समय से चल रहे यूक्रेन युद्ध में महिलाओं व बच्चों पर गहरा असर, यौन हिंसा व तस्करी का जोखिम

यूक्रेन में पिछले छह हफ़्तों से अधिक समय से जारी युद्ध का महिलाओं और लड़कियों पर भीषण असर हुआ है और एक पीढ़ी के बर्बाद हो जाने का जोखिम है.

पिछले छ: हफ्ते से जारी रुस व यूक्रेन युद्ध में काफी क्षति हुई है. इसी के मद्देनजर, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक में सदस्य देशों को आगाह किया है कि यूक्रेन में पिछले छह हफ़्तों से अधिक समय से जारी युद्ध का महिलाओं और लड़कियों पर भीषण असर हुआ है और एक पीढ़ी के बर्बाद हो जाने का जोखिम है.
महिला सशक्तिकरण के लिये प्रयासरत यूएन संस्था की कार्यकारी निदेशक सीमा बाहउस हाल ही में मोल्दोवा की यात्रा से लौटी हैं, जहाँ उन्होंने “यूक्रेन में नासमझी भरे युद्ध के दुष्परिणामों का अनुभव किया.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने सुरक्षा परिषद कौ बताया कि उन्होंने ऐसी महिलाओं और बच्चों से भरी बसें आती देखीं, जो सीमा चौकी पर पहुँचने के बाद यात्रा के कारण थक कर चूर थे और डरे हुए थे.
यूक्रेन में हिंसाग्रस्त इलाक़ों से जान बचाकर आने वाले लोगों के लिये मोल्दोवा ने अपनी सीमाएँ व दरवाज़ें खोले हैं, और 95 हज़ार यूक्रेनी नागरिकों को शरण दी गई है. उन्होंने कहा कि युवतियों को अपना घर रात में छोड़ने, परिवार से अलग होने के लिये मजबूर होना पड़ा और भविष्य के प्रति निरन्तर भय सता रहा है. इस आघात से एक पूरी पीढ़ी के बर्बाद हो जाने का जोखिम है.
यूएन एजेंसी की शीर्ष अधिकारी ने बलात्कार और यौन हिंसा के कथित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों की अलग से स्वतंत्र जाँच कराए जाने की ज़रूरत है ताकि निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
उन्होंने संकट और अधिक गहराने की स्थिति में मानव तस्करी का जोखिम बढ़ने के प्रति भी चिन्ता जताई, जिसमें युवा महिलाओं और परिवार से अलग हो गए या अकेले रह रहे किशोरों को अधिक ख़तरा है.

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