आर्थिक संकट की मार से गुजर रहे श्रीलंका में विरोध प्रदर्शन से मानवाधिकार विशेषज्ञों को आम लोगों के दमन की चिंता

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने श्रीलंका सरकार से शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने और प्रदर्शनों के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित किये जाने का आग्रह किया है.

भारत का पड़ोसी मुल्क श्रीलंका इनदिनों आर्थिक संकट की मार झेल रहा है. जिसके मद्देनजर, संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने श्रीलंका सरकार से शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने और प्रदर्शनों के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित किये जाने का आग्रह किया है.
गौरतलब है कि विदेशी कर्ज़, भ्रष्टाचार और कोविड-19 महामारी से उपजी चुनौतियों के कारण श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है. श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी के परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति में उछाल आया है, ईंधन और अतिआवश्यक सामान की क़िल्लत है और लम्बे अन्तराल के लिये बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है. बताया गया है कि आर्थिक संकट के कारण खाद्य वस्तुओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता पर गम्भीर असर हुआ है, जिससे निर्धनता में जीवन गुज़ार रहे और गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिये मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. हज़ारों लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लेते हुए देश में राजनैतिक व आर्थिक सुधारों की मांग की है. सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिये आँसूगैस के गोले छोड़े और पानी की तेज़ बौछारों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों और विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच झड़पें हुईं. प्रदर्शनों में लगभग 50 लोग घायल हुए हैं, जिनमें अनेक पत्रकार हैं और 50 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
यूएन विशेषज्ञों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिये आँसू गैस और पानी की तेज़ बौछारों के अत्यधिक इस्तेमाल और सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर रोक लगाये जाने की निन्दा की है.

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